बिलासपुर

शिक्षक चरण दास की लिखी कहानी रोटी का पेड़ का हुआ विमोचन और प्रदर्शनी

(मोहम्मद नज़ीर हुसैन) बिलासपुर

बाल साहित्य पर खैरागढ़ में आयोजित राज्य स्तरीय शैक्षिक संगोष्ठी
शिक्षक चरण दास की लिखी कहानी रोटी का पेड़ का हुआ विमोचन और प्रदर्शनी



बिलासपुर ख़बर 36 गढ़ न्यूज:- राज्य परियोजना कार्यालय समग्र शिक्षा छत्तीसगढ़ , राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद छत्तीसगढ़ तथा रुम टू रीड इण्डिया के तत्वावधान में बाल साहित्य में दृश्य चित्र के महत्व पर राज्य स्तरीय शैक्षिक संगोष्ठी का आयोजन इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ में किया गया ।संगोष्ठी का शुभारंभ अतिथियों के द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया । इंदिरा कला एवं संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ के कुलपति माननीया डॉ मोक्षदा ममता चन्द्राकर , समग्र शिक्षा रायपुर छत्तीसगढ़ से डॉ एम सुधीश सहायक संचालक तथा जिला शिक्षा अधिकारी जिला खैरागढ़-छुईखदान-गण्डई की गरिमामयी उपस्थिति रही। बाल साहित्य पर उनके प्रेरणादायक विचारों से आडिटोरियम गुंजित हुआ।
रुम टू रीड इण्डिया संस्था से आए अतिथियों में प्रमुख रुप से सत्यव्रता सेन , हेड रुम टू रीड , प्रोईती राय कहानीकार , डॉ प्राची कालरा प्राध्यापिका, सुविधा मिस्त्री बाल चित्रकार , डॉ राजन यादव डीन द्वारा बाल साहित्य में दृश्य चित्र के महत्व पर विस्तृत रुप से व्याख्यान दिया गया। इंटरनेट, मोबाइल व टीवी चैनल के इस युग में चिड़िया, तितली की कविता, जंगल का राजा व परियों की रानी जैसी कहानियों का अस्तित्व खत्म होता जा रहा है।प्रत्येक शैक्षिक प्रक्रिया साहित्य से शुरू होती है, क्योंकि यह एक सूचनात्मक भूमिका निभाती है और ज्ञान के द्वार खोलती है, ज्ञान तक पहुंच प्रदान करती है, व्यावहारिक जीवन में जानकारी लाती है। शिक्षण प्रक्रिया में कहानी और कथा आधारित चित्र का प्रयोग अभूतपूर्व सफलता लाती है। प्राथमिक स्तर के बच्चों की मानसिक आवश्यकताओं की पूर्ति का शक्तिशाली माध्यम अच्छा बाल साहित्य और उस पर आधारित चित्र ही है। आस-पास की सुपरिचित वस्तुओं, पशु-पक्षियों, खिलौनों , जानवरों की कहानियाँ और चित्र उसे अपने अनुभवों को नए संदर्भों में देखने का अवसर देती हैं। प्राचीन भारतीय चित्रकला का एक बहुत बड़ा हिस्सा लम्बे समय तक देवी-देवताओं के चित्रणों से भरा रहा है।आज के छात्र अपने रोजमर्रा के जीवन में दृश्य मीडिया से घिरे रहते हैं। इंटरनेट के भारी उपयोग के कारण, वे पाठ्य और दृश्य दोनों रूपों में जानकारी तक पहुँचने के आदी हो गए हैं। कक्षा में कहानियों के साथ छवियों का उपयोग एक शैक्षणिक रणनीति है । डिजिटल तकनीक ने छवियों को अधिक आसानी से उपलब्ध कराया है और शिक्षण और सीखने की सामग्री में शामिल करना आसान बना दिया है। कहानी माध्यम से शिक्षण में छवियों के उपयोग से छात्रों की सहभागिता और चर्चा में वृद्धि संभव है। कहानियों के पात्रों पर आधारित चित्रों को देखकर प्रारंभिक स्तर के विद्यार्थियों में आत्मसात करने की वृत्ति का विकास होता है। चित्रकला के विभिन्न नवीनतम आयामों पर सुप्रसिध्द चित्रकार सुविधा मिस्त्री द्वारा विश्वविद्यालय के ललित कला प्रशिक्षुओं के साथ परस्पर अंत:क्रिया संवाद स्थापित किया गया। जिसमें छत्तीसगढ़ प्रांत के विभिन्न जिलों के शिक्षकों द्वारा लिखी एवं अनुवाद की गई बाल साहित्य किताबों की प्रदर्शनी लगाई गई। इस प्रदर्शन में बिलासपुर जिला के मस्तूरी के शिक्षक चरण दास महंत द्वारा लिखित कहानी ‘रोटी का पेड़’ का भी विमोचन एवं प्रदर्शन किया गया। इस संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य बाल साहित्य में दृश्य चित्रों का महत्व एवं बच्चों के सीखने में बाल साहित्य की भूमिका स्थापित करना हैं। इसके साथ ही विश्वविद्यालय के विद्वानों तथा शिक्षाविदों को छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग की बाल साहित्य से संबंधित आवश्यकताओं से जोड़ना और छत्तीसगढ़ में शैक्षिक प्रदर्शन को समृद्ध करने के लिए स्थानीय प्रतिभाओं संसाधनों शिक्षकों नीति निर्माताओं, गैर सरकारी संगठनों और कलाकारों के बीच सहयोग के अवसर को बढ़ावा देना हैं।
इंदिरा कला एवं संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ के इतिहास तथा पराक्रम पर स्वरचित कविता की प्रस्तुति के माध्यम से चित्रकला व ललित कला विभाग के डीन डॉ राजन यादव द्वारा संगोष्ठी के अंत में आभार व्यक्त किया गया। संगोष्ठी में प्रमुख रुप से राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद रायपुर से डेकेश्वर वर्मा , समग्र शिक्षा से ताराचंद जायसवाल, रुम टू रीड से यशवर्धन सिंह , प्रदीप , सीमा सिंह, सामन्त , मुकेश , बाल साहित्यकार , बाल कथा लेखक और अनुवादक शिक्षक के रुप में कन्हैया साहू , जीवन चन्द्राकर, टिकेश्वर सिन्हा , भोलाराम वर्मा, विजय दमाली , चरणदास महंत, फिरोज मोहम्मद, अनिता मंदिलवार , सुनीता यादव , सुधारानी शर्मा ,अनिता तिवारी, योगेश्वरी साहू, पूर्णेश डडसेना ,शीतल बैस, अलबिना एक्का , सुनीता भगत , किरण सिंह , योगेश साहू , दुर्बादल दीप , रामेश्वर भगत ,अनिल कुल्लु, ईतेन्द्र नाग , गणेश सोढ़ी ,दिनेश तेलम, शंकर नाग , शिव नेताम सहित शताधिक व्यक्ति सम्मिलित हुए। मस्तूरी से चरण दास महंत सहायक शिक्षक शासकीय प्राथमिक विद्यालय धनुहार पारा कुकदा ने अपनी सहभागिता निभाई | इनकी इस उपलब्धि पर ए के भारद्वाज विकास खण्ड शिक्षा अधिकारी मस्तूरी, बी पी साहू विकास खण्ड स्त्रोत समन्वयक मस्तूरी, बसंत जायसवाल शैक्षिक समन्वयक, मो. नजीर वरिष्ठ पत्रकार, शिक्षक मनोज पाटनवार, श्रीमती चंद्रिका मिरी सहित क्षेत्र के शिक्षकों और ग्रामवासियों ने शुभकामना प्रेषित किया है।

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