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रमजान उल मुबारक : इबादत में गुजर रहा हर दिन, हर लम्हा,हर रात khabar 36 Garh is news Raipur Chhattisgarh

जिस शख्स का मकसद आखेरात की बेहतरी हो, अल्लाह ताअला उसके दिल को गनी कर देता है, उसके बिखरे हुए कामों को समेट देता है और दुनिया ज़लील हो कर उसके पास आती हैं।
तिर्मीज़ी शरीफ

रोजा रखने के साथ ज्यादातर घरों की बदल गई रूटीन


Mohammad Nazir Hossain chief editor Raipur Chhattisgarh

ख़बर 36 गढ़ बिलासपुर: मस्तूरी विकासखंड अंतर्गत सीपत क्षेत्र खम्हरियां में मस्जिद को रमजानुल मुबारक के मौके पर शानदार तरीके से सजाया गया है वहीं माहे रमजान का पहला अशरा गुजरने को है। रोजा रखने के साथ ही लोग इबादात में मशगूल हैं। इसकी वजह से कई घरों की रूटीन काफी बदल गई है। हर रोज सहरी के वक्त उठने से लेकर शाम को इफ्तार और रात में तरावीह के अलावा नफली इबादात का सिलसिला जारी है। रमजानुल मुबारक की अजमत को देखते हुए लोग इबादत के साथ-साथ दूसरी तैयारियों में भी मशरूफ हैं। मस्जिदों में नमाजियों की तादाद बढ़ गई है, वहीं इफ्तार के वक्त लोग एक साथ रोजा खोलने जुट रहे हैं।
 

रोजा हर बालिग, आकिल मर्द और औरत पर फ़र्ज़ है। इसलिए इसकी पाबंदी का खास ख्याल रखना चाहिए।

खाने ख़ुदा मस्जिद खम्हरियां के इमाम मोहम्मद अब्दुल्ला साहब कहते हैं, रोजा हर बालिग, आकिल मर्द और औरत पर फ़र्ज़ है। इसलिए इसकी पाबंदी का खास ख्याल रखना चाहिए। रोजे से सिर्फ बीमारों और मुसाफिरों को छूट है। वो भी इस शर्त के साथ कि बाद में इसकी भरपाई कर ली जाए। बीमार जब सेहतमंद हो जाए और मुसाफिर अपने मुकाम पर पहुंच जाए तो उसे अपने छूटे हुए रोजे पूरे कर लेने चाहिए।

दिल को साफ़ करने और समाज के कमजोर तबकों के तंई जिम्मेदारी निभाने का पैगाम देता है।

खम्हरियां मस्जिद के मुतवल्ली (सरवराकार) जनाब मोहम्मद खां साहब रमजान शरीफ़ की मुबारकबाद देते हुए कहते हैं , रमजान सिर्फ़ रोज़ा रखने का नाम नहीं, बल्कि रूह की पाकीजगी, सब्र का इम्तेहान और खिदमते खल्क का महीना है। यह महीना हमें अपने रब से जुड़ने, दिल को साफ़ करने और समाज के कमजोर तबकों के तंई जिम्मेदारी निभाने का पैगाम देता है।

रमज़ान शरीफ़ का असल पैग़ाम सब्र है। दिन भर की भूख-प्यास इंसान को यह एहसास दिलाती है कि समाज में कितने लोग ऐसे हैं, जो रोज़ाना इसी हालात से गुजरते हैं। जब इंसान खुद भूखा रहता है तो उसे गरीब और जरूरतमंद लोगों का दर्द समझ में आता है। ये एहसास ही उसे दूसरों की मदद के लिए हौसला अफजाई करता है। इस महीने में जकात, सदका और फितरा देने की खास हिदायत है, ताकि समाज में माली तवाजुन बना रहे और कोई भी शख्स भूखा न सोए। रमज़ान रहमत और बरकत का महीना है। इस महीने में की गई इबादतों का सवाब कई गुना बढ़ा दिया जाता है।

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