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राखड़ डेम में करंट लगने से युवा मजदूर की मौत : एनटीपीसी की ठेका कंपनी आईएमएस शिपमेंट एजेंसी पर सुरक्षा लापरवाही के लगें आरोप:

19 वर्षीय संविदा कर्मी की ड्यूटी के दौरान मौत, सुरक्षा उपकरणों और विद्युत व्यवस्था पर उठे सवाल; मजदूरों ने मुआवजा व परिवार के एक सदस्य को रोजगार देने की मांग

Mohammad Nazir Hossain chief editor

ख़बर 36 गढ़ न्यूज़ बिलासपुर/सीपत: एनटीपीसी सीपत के राखड़ डेम में संचालित ड्रेजिंग कार्य के दौरान हुई एक दर्दनाक दुर्घटना ने औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्थाओं की पोल खोलकर रख दी है। एनटीपीसी की ठेका कंपनी आईएमएस शिपमेंट एजेंसी में कार्यरत एक 19 वर्षीय संविदा कर्मी की करंट लगने से मौत हो गई। इस हादसे के बाद कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों, विद्युत उपकरणों की निगरानी और श्रमिकों को उपलब्ध कराए जाने वाले सुरक्षा संसाधनों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मृतक की पहचान पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के मांगी टोला निवासी नूर मोहम्मद (19 वर्ष), पिता सेनौल एस.के., के रूप में हुई है। वह आईएमएस शिपमेंट एजेंसी के माध्यम से एनटीपीसी सीपत के ग्राम रांक स्थित ऐश डाइक-1 के ओवरफ्लो लैगून क्षेत्र में स्थापित पंप संचालन कार्य में तैनात था। प्राप्त जानकारी के अनुसार ड्यूटी के दौरान पंप के समीप कार्य करते समय नूर मोहम्मद अचानक करंट की चपेट में आ गया। हादसा इतना गंभीर था कि उसकी मौके पर ही मौत हो गई। सोमवार सुबह लगभग 8:45 बजे एनटीपीसी सीआईएसएफ के जवानों ने जलाशय क्षेत्र में शव देखा और तत्काल इसकी सूचना एनटीपीसी प्रबंधन एवं पुलिस को दी। सूचना मिलते ही सीपत थाना प्रभारी राजेश मिश्रा पुलिस बल के साथ घटनास्थल पहुंचे। जलाशय के दूसरे छोर से नाव की सहायता से शव को बाहर निकाला गया। पुलिस ने मौके पर पंचनामा कार्रवाई कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। थाना प्रभारी राजेश मिश्रा ने बताया कि प्रथम दृष्टया मामला करंट लगने से मौत का प्रतीत हो रहा है। हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों की आधिकारिक पुष्टि हो सकेगी।

सुरक्षा इंतजामों पर उठे कई सवाल

इस हादसे ने ठेका कंपनी आईएमएस शिपमेंट एजेंसी की कार्यप्रणाली को सवालों के घेरे में ला खड़ा किया है। क्या श्रमिकों को निर्धारित सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए गए थे? क्या विद्युत उपकरणों और पंप सिस्टम की नियमित जांच की जा रही थी? क्या जोखिम वाले कार्यस्थल पर सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन हो रहा था? ऐसे कई सवाल अब जांच का विषय बन गए हैं। औद्योगिक क्षेत्र में कार्यरत संविदा कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर अक्सर दावे किए जाते हैं, लेकिन इस हादसे ने जमीनी हकीकत को उजागर कर दिया है। एक युवा श्रमिक की मौत ने सुरक्षा प्रबंधन की गंभीरता पर बहस छेड़ दी है।

*मुआवजे और रोजगार की मांग*

घटना के बाद अन्य मजदूरों ने मृतक के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कंपनी से उचित मुआवजा देने की मांग की है। मजदूरों का कहना है कि परिवार के एक सदस्य को संविदा रोजगार भी उपलब्ध कराया जाए, ताकि हादसे से प्रभावित परिवार को आर्थिक संबल मिल सके। फिलहाल सीपत पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है। जांच रिपोर्ट और पोस्टमार्टम निष्कर्ष सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि हादसा महज दुर्घटना था या सुरक्षा लापरवाही का परिणाम।

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