लब्बैक” कहते हुए आए और
रब ने उन्हें “लब्बैक” कहते हुए बुला लिया, मदीने शरीफ और मक्का मुकर्रमा में देखा कि हर नमाज़ के बाद जनाज़े की नमाज़ होती थी: khabar 36 Garh is news Raipur Chhattisgarh

ये सफेद कफ़न,ये सफेद एहराम
क़यामत के दिन ये सब इसी हालत में “लब्बैक” कहते हुए उठेंगे। सुभानल्लाह

हज करने आए और शहीद का दर्जा मिला
Mohammad Nazir Hossain chief editor
ख़बर 36 गढ़ न्यूज़ रायपुर: मोहम्मद जाकिर घुरसेना साहब रायपुर लिखते हैं कि हज मुक्कदस के लिए दुनिया भर से मुसलमान पहुंचे और वो “लब्बैक” कहते हुए आए थे
रब ने उन्हें “लब्बैक” कहते हुए ही बुला लिया। मदीने शरीफ और मक्का मुकर्रमा में देखा हर नमाज़ के बाद जनाज़े की नमाज़ होती थी। सुभानल्लाह कितने खुश नसीब हैं वो लोग जो जन्नतुल बक़ी में जगह मिली जहां के बारे में जितनी तारीफ करें कम है। वहां मेरे आका स, अलैहि वसल्लम के घर वाले, सहाबा और न जाने कितने बड़े बुजुर्ग आराम फरमा हैं। कई लोगों का अरफात में भी इंतेकाल हुआ ऐसे खुशनसीब बहुत कम लोग होते हैं।
एहराम में आए थे, कफ़न बन गया। हज की नियत से निकले थे, शहादत मिल गई।
दुनिया से अरफ़ात के मैदान में रुख़सत हुए, इससे बड़ी खुशनसीबी क्या होगी?
रसूलुल्लाह ﷺ ने फरमाया: “जो हज के लिए निकले और रास्ते में इंतकाल कर जाए, उसे क़यामत तक हज का सवाब मिलता रहेगा।” सुभानल्लाह।
ये सफेद कफ़न,ये सफेद एहराम
क़यामत के दिन ये सब इसी हालत में “लब्बैक” कहते हुए उठेंगे। सुभानल्लाह
या अल्लाह मदीने शरीफ, मक्का मुकर्रमा अरफ़ात में वफात पाने वाले तमाम हाजियों की मगफिरत फरमा।
उनके दर्जे बुलंद फरमा। उनके घर वालों को सब्र-ए-जमील अता फरमा। आमीन
आप लोगों की दुआओं से हम सब हज के सारे अरकान बहुत अच्छे से पूरा कर वापस मक्का मुकर्रमा पहुंच गए हैं। हज के वो 5 दिन में हमारी हालत देखने लायक थी, वहीं मेरे आका स अ व ने उम्मतियों कितना तकलीफ उठाए थे। कुर्बान जाऊं मेरे आका स अ व पर जिन्होंने अरफात में असर से मग़रिब तक सिर्फ़ उम्मतियों के लिए रो रो कर अल्लाह से दुआ कर रहे थे। उसी को याद कर उम्मती भी उनके सदके अल्लाह पाक से गिड़गिड़ा कर दुआ मांगते रहे, सुभानल्लाह क्या मंजर था। अल्लाह पाक हर मुस्लमान को यहां पर दुआ मांगने की तौफीक अता फरमाए… आमीन सुम्मा आमीन








