बिलासपुर

मुड़पार तेंदुवा कोटवार मानिकदास की मनमानी दबंगई से पांच पेड़ों को अवैध रूप से काटा गया

Byमोहम्मद नज़ीर हुसैन बिलासपुर



बिलासपुर:- को वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी द्वय श्री कुमार निशांत, वन मंडल अधिकारी बिलासपुर एवं श्री सुनील बच्चन, उप वन मंडल अधिकारी बिलासपुर को मुखबिर से सुचना मिली कि वन परिक्षेत्र बिलासपुर के सीपत परिवृत्त अंतर्गत- ग्राम मुड़पार (तें.) में कुछ वृक्षों की अवैध कटाई की गई है। अधिकारियों द्वारा संबंधित परिक्षेत्र सहायक सीपत-अजय बेन को कार्यवाही करने हेतु निर्देशित किया गया

मुड़पार कोटवार मानिक दास ने दबंगई दिखाते हुए पेड़ों को काट कर अवैध रूप बेचा


जिसके परिपालन में वन परिक्षेत्र अधिकारी बिलासपुर श्री पल्लव नायक से मार्गदर्शन प्राप्त कर परिक्षेत्र सहायक सीपत, अपने अधीनस्थ वन कर्मचारीयों,केशव गिरी गोस्वामी (परिसर रक्षक ठरकपुर), लोरिक राम कुर्रे एवं रामदयाल के साथ मौके पर पहुंचकर, जांच कर कार्यवाही की गई।
प्रकरण का विवरण निम्नानुसार है कि-ग्राम मुड़पार (तें.) मैं कुटी आश्रम स्थित है,जो बाबा स्वर्गीय राघव नंदी महाराज जी के मालिकाना हक में है। वहां पर विभिन्न प्रजाति क्रमशः अर्जुन ,जामुन, सेमल, पलाश, बबूल, सागौन इत्यादि के लगभग 70 नग वृक्ष स्थापित हैं, जिसको अवैध रूप से ग्राम मुड़पार (तें.) के कोटवार मानिकदास पिता स्वर्गीय दुखी दास (उम्र 60 वर्ष) द्वारा ग्राम एरमसाही निवासी अशोक कुमार टंडन पिता स्वर्गीय राम जी (उम्र 44 वर्ष) के पास ₹30,000/- में बेच दिया गया है। उक्त राशि में से ₹10,000/- अग्रिम प्राप्त कर वृक्षों को काटने की मौखिक अनुमति ग्राम कोटवार मानिकदास द्वारा दी गई है। क्रेता अशोक कुमार टंडन द्वारा मौके पर पांच वृक्षों को काट दिया गया है।
सेमल प्रजाति के 2 नग वृक्ष के लट्ठे मौके पर पड़े हुए हैं, एक नग सागौन वृक्ष के लठ्ठों को क्रेता द्वारा अपने घर परिवहन करा लिया गया है साथ ही 2 नग बबूल के लठ्ठों को मुड़पार के ही लखन केश्कर नाम का आदमी कोटवार के कहने पर ही ले गया है


परिक्षेत्र सहायक सीपत द्वारा बयान दर्ज करने पर, ग्रामीण जनों एवं गवाहों के समक्ष विक्रेता कोटवार मानिकदास एवं क्रेता अशोक कुमार टंडन ने अपना अपराध स्वीकार किया।संपूर्ण कार्यवाही में ग्राम मुड़पार (तें.) के नागरिक आशीष बाकरे,रिंकू जायसवाल संतोष यादव, उपसरपंच यादव जी एवं अन्य गणमान्य नागरिकों ने वन विभाग का सहयोग किया उक्त प्रकरण में भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 52, छत्तीसगढ़ परिवहन (वन उपज) नियम 2001,छत्तीसगढ़ वन उपज (व्यापार विनियमन) अधिनियम 1969 एवं वृक्ष कटाई के नियम 2022 की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत कार्यवाही की गई

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