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बिलासपुर जिला अस्पताल: प्रसूता महिलाओं से अवैध उगाही का सारा खेल किसके संरक्षण पर संचालित होता है ? Khabar 36 Garh is News bilaspur

          Mohammad Nazir Hossain chief editor bilaspur chhattisgarh

ख़बर 36 गढ़ न्यूज़ बिलासपुर – सिविल सर्जन अनिल गुप्ता के प्रभार क्षेत्र जिला अस्पताल एवं मातृ शिशु हॉस्पिटल इन दिनों सुर्खियों पर है. अस्पताल में आने वाले मरीज से स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी द्वारा दुर्व्यवहार करने से लेकर अवैध उगाही तक का मामला रोजमर्रा मे तब्दील हो चुका है. इस अस्पताल में प्रसूता महिलाओं से अवैध उगाही का सारा खेल किसके संरक्षण पर संचालित होता है यह बात किसी से छिपी नहीं है दूसरे और सरल शब्दों में कहा जाए तो बिलासपुर जिला अस्पताल एवं मातृ शिशु हॉस्पिटल अव्यवस्था का आलम अपनी परकाष्ठा पार कर चुका है.

जिला बिलासपुर के लिए दुर्भाग्य की बात है कि मातृ शिशु अस्पताल मे आने वाले मरीज को अब जान – माल का खतरा सताने लगा है. किसी भी मरीज से अवैध उगाही करना, कर्मचारी द्वारा गलत इलाज के कारण यातनाएं झेलना मरीज के लिए आम बात हो चली है. जिसका उदाहरण अक्टूबर महीना मे मातृत्व शिशु अस्पताल जिला बिलासपुर मे हुए घटना को जानकार अंदाजा लगाया जा सकता है. जिसमें डॉक्टर, एवं कर्मचारी के द्वारा गलत इलाज के कारण जच्चा- बच्चा की जान जा चुकी है और इतना बड़ा मामला को योजनाबद्ध तरीके से ठंडा बस्ता में डालने का प्रयास सिविल सर्जन अनिल गुप्ता द्वारा किया जा रहा है. बताया जाता है कि जब से जिला बिलासपुर में सिविल सर्जन का प्रभार अनिल गुप्ता को दिया गया है तब से यह अस्पताल मरीज के लिए अवैध उगाही एवं यातना केंद्र बन चुका
हैिला बिलासपुर के लिए दुर्भाग्य की बात है कि मातृ शिशु अस्पताल मे आने वाले मरीज को अब जान – माल का खतरा सताने लगा है. किसी भी मरीज से अवैध उगाही करना, कर्मचारी द्वारा गलत इलाज के कारण यातनाएं झेलना मरीज के लिए आम बात हो चली है. जिसका उदाहरण अक्टूबर महीना मे मातृत्व शिशु अस्पताल जिला बिलासपुर मे हुए घटना को जानकार अंदाजा लगाया जा सकता है. जिसमें डॉक्टर, एवं कर्मचारी के द्वारा गलत इलाज के कारण जच्चा- बच्चा की जान जा चुकी है और इतना बड़ा मामला को योजनाबद्ध तरीके से ठंडा बस्ता में डालने का प्रयास सिविल सर्जन अनिल गुप्ता द्वारा किया जा रहा है. बताया जाता है कि जब से जिला बिलासपुर में सिविल सर्जन का प्रभार अनिल गुप्ता को दिया गया है तब से यह अस्पताल मरीज के लिए अवैध उगाही एवं यातना केंद्र बन चुका है


सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार घटना लगभग 18 अक्टूबर 2025 के आसपास का होना बताया जा रहा है. शहर में चर्चा है कि मृतक महिला जीतेश्वरी रानी साहू पति राकेश साहू कुंदरापारा वार्ड क्रमांक 5 तिफरा, जिला बिलासपुर छत्तीसगढ़ कि रहने वाली थी एवं घटना दिनांक को डिलवरी कराने प्रसूता महिला को मातृ शिशु अस्पताल जिला बिलासपुर में भर्ती कराया गया. जहां पर सिजेरियन के बाद नवजात शिशु एवं दूसरे दिन प्रसूता महिला जीतेश्वरी रानी साहू कि मृत्यु होना बताया जा रहा है.



ऐसा कौन सा इंजेक्शन लगाया गया जिसके कारण प्रसूता एवं बच्चा दोनों की हो गई मौत ?



प्रसूता महिला को डिलीवरी कराने के लिए परिजनों द्वारा मातृ शिशु अस्पताल जिला बिलासपुर में भर्ती कराया गया. सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार इलाज के दरमियान उक्त महिला को एक इंजेक्शन दिया गया. जिसके बाद सीजर करके बच्चा निकला गया. चर्चा है कि कुछ देर बाद परिजनों को नवजात शिशु की मृत्यु होने कि जानकारी दी गई. वही कुछ समय बाद प्रसूता महिला की हालत बिगड़ने पर सिम्स अस्पताल रिफर किया गया. दूसरे दिन प्रसूता महिला ने भी दम तोड़ दिया. पूरे घटनाक्रम मे डॉक्टर एवं स्टाफ की लापरवाही से जच्चा- बच्चा दोनों की मौत होने की बात कही जा रही है. उक्त मामले मे चर्चा यह भी है कि प्रसूता महिला का सिजेरियन किया गया. ऐसी स्थिति में बच्चा स्वस्थ होना चाहिए था. दूसरे पहलू को देखा जाए तो अगर बच्चा स्वस्थ नहीं था तो सिजेरियन क्यों और किस अधिकारी की अनुमति से किया गया. यह जांच का विषय है.


प्रसूता महिला को हाई रिस्क प्रेगनेंसी रहा तो सिम्स रिफर क्यों नहीं किया गया ?

प्रसूता महिला जीतेश्वरी रानी साहू का अगर हाई रिस्क प्रेगनेंसी रहा तो उसे सिम्स अस्पताल रिफर किया जाना रहा. लेकिन ऐसा नहीं किया जो की अपने आप में एक बड़ा सवाल है. दूसरी ओर बात किया जाए कि अगर उनकी प्रेगनेंसी सामान्य रही तो डिलीवरी होने के बाद अचानक उसे सिम्स अस्पताल किन कारणों से रिफर किया गया.

प्रसूता मृतक महिला जीतेश्वरी रानी साहू एवं नवजात शिशु की मौत मातृ शिशु अस्पताल बिलासपुर मे कार्यरत डॉक्टर एवं कर्मचारी कि ईलाज में लापरवाही की पोल खोलता है एवं यहां के प्रभारी सिविल सर्जन अनिल गुप्ता की फेलियर नीति को उजागर करता है. मामले पर अनिल गुप्ता सिविल सर्जन से  मीडिया ने फोन के माध्यम से जानकारी लेने का प्रयास किया तब उनके द्वारा टाल मटोल करते हुए अस्पताल आकर बात करने की बात फोन पर कही गई.



स्वास्थ्य विभाग के महकमें पर चर्चा है कि छत्तीसगढ़ प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल का पहला पसंदीदा अधिकारी कथित विवादित सिविल सर्जन अनिल गुप्ता होना बताया जाता है. जिसमे की विभागीय मंत्री जी का संरक्षण सिविल सर्जन अनिल गुप्ता को प्राप्त होने की चर्चा है. शायद इसीलिए उनकी गलतियों पर विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को पर्दा डालने कि आवश्यकता पड़ती है . सिविल सर्जन अनिल गुप्ता के खिलाफ गलत व्यवहार एवं कई शिकायत होने के बाद भी उनके खिलाफ कोई ठोस कार्यवाही नहीं किया जाता है. अब देखना होगा इतनी गंभीर मामले में स्वास्थ्य विभाग के मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल का क्या एक्शन होता है.


सुभह गरेवाल
(मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी)

ऐसी कोई घटना हुई है और अगर परिजन के द्वारा कोई शिकायत मुझे प्राप्त होती है. तो टीम बनाकर विधिवत जांच कराऊंगी



सुलगते सवाल……..

सिविल सर्जन अनिल गुप्ता के प्रभार लेने के बाद कितना जच्चा एवं कितना बच्चा की मौत हो गई. इसकी जांच होगी क्या ?

प्रसूता महिला जीतेश्वरी रानी साहू को कौन सा इंजेक्शन लगाया गया. जिसके बाद जच्चा – बच्चा दोनों की मौत हो गई इस बात की जांच होगी क्या.?

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