हज से जिंदगी को नई दिशा मिलती है: ज़ाकिर घुरसेना khabar 36 Garh is news Raipur Chhattisgarh

हम इस क़ुबूल हज को कैसे मक़बूल करें , कैसे अपनी ज़िंदगी में अमल में लाएं, अल्लाह ने हम सबको बेहिसाब खुशियां दी हैं,

Mohammad Nazir Hossain chief editor
ख़बर 36 गढ़ न्यूज़ रायपुर:
अल्लाह का शुक्र है, तवाफ़ ए विदा के साथ हमारा हज मुकम्मल हुआ, 29 अप्रैल को हम नागपुर से सीधे मदीने शरीफ पहुंचे थे 8 दिन गुजारने के बाद मक्का मुकर्रमा पहुंच गए थे फिर 5 दिन हज के अरकान के लिए मिना, आरफ़ात और मुजदलफा में रहने के बाद 29 मई को फिर से मक्का मुकर्रमा आ गए अब 18 जून तक इंशाअल्लाह यहीं कयाम रहेगा। अल्लाह ने तो हम सब पर यह बड़ी महरबानी की, दुआ है आप सभी भी जल्दी आएं , अब ज़िम्मेदारी हम सबकी है, हम इस क़ुबूल हज को कैसे मक़बूल करें , कैसे अपनी ज़िंदगी में अमल में लाएं, अल्लाह ने हम सबको बेहिसाब खुशियां दी हैं, शुक्र है अल्लाह का, बड़ी खुशी हज कुबूलियत, गुनाहों की माफी की, फिर दूसरी खुशी अपने वतन वापसी की, अपनी मिट्टी में फिर से बैठने खेलने की, अपनों के साथ हंसने बोलने की, अपने पुराने यारों,दोस्त भाइयों, सहकर्मियों से मिलने जुलने की।
हज़रत फतेह शाह मस्जिद, छोटापारा, पुरानी बस्ती, राजातालाब, मौदहापारा, बैरन बाज़ार, संजय नगर, जामा मस्ज़िद, मदीना मस्ज़िद, ये सब भी अब याद आ रहा है। इससे शायद ये जाहिर होता है ( ये मेरी सोच है) कि हज मुकम्मल होने के बाद अल्लाह पाक सभी के दिलों में वासवसा डाल दे रहा है और सबको अपने घर की याद आने लगती है दुआ में एक एक को याद करते रहने के बावजूद घर वापसी की तड़फ नहीं होती थी लेकिन अब हज होने के बाद अब वापसी की तड़फ बढ़ने भी लगी है। लेकिन मक्का मुकर्रमा को छोड़ने का ग़म भी सता रहा है। अजीब सी कैफियत है। अब असली इम्तेहान है हाजियों की, इंशाअल्लाह अब हिदायतों के साथ ज़िंदगी शुरू रहेगी, हज का यह सफर अहराम की बंदिशों से आज़ादी के बाद भी इंशाअल्लाह अहराम की पाबन्दियों की तरह ही आगे की जिंदगी गुज़रे, अल्लाह से बस यही दुआ है। देखें तो हज से इंसानी जिंदगी को एक नई दिशा मिलती है बशर्ते उस दिशा में चलने की जरूरत है तभी तो हज सार्थक है वरना शहर में तरह तरह के रंग बिरंगे लोग मिलते हैं। खैर अल्लाह सबको सही तरीके से सुन्नत तरीके से जिंदगी गुजारने की तौफीक अता फरमाए। हज के दौरान मैने इस्लामिक हिस्ट्री से जुड़े ऐतिहासिक स्थलों की फोटो और जानकारी आप लोगों तक वॉट्सअप के ज़रिए भेजा। हालांकि इन सब की जानकारी आप सभी को थी फिर भी आदत के मुताबिक़ इबादत से फारिग होने के बाद लिखता रहा। अहराम की जो पाबंदी में हम सब रहे, अल्लाह पाक हज,अहराम की पाबन्दियां आगे भी कायम रखे। मेरे वतन के उन सभी लोगों का शुक्रिया, मेरे वतन की गंगा जमुनी तहज़ीब, खुलूस मोहब्बत से भरे मेरे सभी धर्मों से जुड़े उन सभी भाइयों का शुक्रिया जिन्होंने तहे दिल से मुझे सराहा, प्यार दिया, दुआएं दीं मुबारक़बाद दी और अपने परिवार वालों की खैरियत की दुवाएं मुझसे करवाई। अल्लाह पाक उन सभी लोगों की नेक ख्वाहिशों को पूरा फरमाए… आमीन









