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अपोलो हॉस्पिटल मामला पर सीबीआई जांच मांग:19 साल पुराने इलाज पर फिर छिड़ी बहस, परिजनों ने की सीबीआई जांच की मांग: khabar 36 Garh is News Raipur Chhattisgarh

सीबीआई जांच मांग: फर्जी डॉक्टर केस में अपोलो को क्लीन चिट पीड़ित परिवार ने उठाए सवाल




Mohmmad Nazir Hossain chief editor

ख़बर 36 गढ़ न्यूज़ बिलासपुर:- बिलासपुर का अपोलो अस्पताल एक बार फिर सुर्खियों में है। फर्जी डॉक्टर नरेंद्र विक्रमादित्य यादव उर्फ एन जॉन केम से जुड़े मामले में पुलिस ने कोर्ट में चालान पेश कर दिया है। जांच में अस्पताल प्रबंधन को क्लीन चिट मिल गई है, लेकिन पूर्व विधानसभा अध्यक्ष स्वर्गीय राजेंद्र प्रसाद शुक्ल के परिजनों ने इस जांच पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग की है।



मामला वर्ष 2006 का है, जब बिलासपुर के अपोलो अस्पताल में कार्यरत डॉक्टर नरेंद्र विक्रमादित्य यादव उर्फ एन जॉन केम पर फर्जी डिग्री के आधार पर इलाज करने के आरोप लगे। आरोप है कि उसके इलाज से दो दर्जन से अधिक मरीजों की मौत हुई और कई अन्य मरीजों की जान खतरे में पड़ी। मध्यप्रदेश के दमोह से गिरफ्तारी के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आया।पूर्व विधानसभा अध्यक्ष स्वर्गीय राजेंद्र प्रसाद शुक्ल के पुत्र प्रो. प्रदीप शुक्ल ने अपने पिता का इलाज करने वाले डॉक्टर की पहचान करते हुए फर्जी डॉक्टर के साथ-साथ अपोलो अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ भी शिकायत दर्ज कराई। अस्पताल के रिकॉर्ड के अनुसार वर्ष 2002 से 2006 के बीच राजेंद्र प्रसाद शुक्ल का 13 बार इलाज हुआ। 1 जून 2006 को आरोपी डॉक्टर की नियुक्ति हुई और 2 अगस्त 2006 को उसी ने उनकी एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी की। इसके बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई और 20 अगस्त 2006 को उनका निधन हो गया।करीब 19 वर्ष बाद अप्रैल 2025 में परिजनों को जानकारी मिली कि इलाज करने वाला डॉक्टर फर्जी डिग्री मामले में गिरफ्तार हुआ है। इसके बाद सरकंडा थाने में शिकायत दी गई। जांच के बाद पुलिस ने फर्जी डॉक्टर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की और अब कोर्ट में चालान पेश कर दिया है। हालांकि जांच में अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ किसी आपराधिक षड्यंत्र के साक्ष्य नहीं मिलने की बात कहते हुए उसे क्लीन चिट दे दी गई है।

रजनेश सिंह, एसएसपी बिलासपुर

पुलिस की इस जांच से पीड़ित परिवार संतुष्ट नहीं है। परिजनों का कहना है कि जिस अस्पताल ने फर्जी डॉक्टर को नियुक्त किया, उसकी जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए सीबीआई जांच की मांग की है।

प्रो. प्रदीप शुक्ल, स्व. पूर्व विधानसभा अध्यक्ष के पुत्र

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि मरीज अस्पताल और उसकी व्यवस्था पर भरोसा करके इलाज कराता है। ऐसे में डॉक्टर की नियुक्ति की प्रक्रिया और उसकी सत्यता सुनिश्चित करना अस्पताल प्रबंधन की जिम्मेदारी होती है। यदि नियुक्ति में लापरवाही हुई है तो उसकी भी कानूनी जवाबदेही तय हो सकती है।

अजय अयाची, क्रिमिनल लॉयर, हाईकोर्ट

फिलहाल पुलिस की जांच पूरी हो चुकी है और अदालत में चालान भी पेश किया जा चुका है। लेकिन अपोलो अस्पताल को मिली क्लीन चिट, पीड़ित परिवार के गंभीर आरोप और सीबीआई जांच की मांग ने इस मामले को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। अब सबकी नजर अदालत की आगामी कार्रवाई और इस बहुचर्चित मामले के अगले कानूनी चरण पर टिकी है।

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