कोरोना काल में भी नहीं रुकी पढ़ाई,आज स्मार्ट क्लास में स्टाइलिश पेन से भविष्य लिख रहे हैं ग्रामीण बच्चे: khabar 36 Garh is News Sipat ntpc bilaspur chhattisgarh

शिक्षक दिवस 2026 विशेष

ऑनलाइन क्लास से मोहल्ला क्लास तक, डिजिटल नवाचार और जनसहयोग से शिक्षा की तस्वीर बदलने वाले शिक्षक चरण दास महंत

Mohammad Nazir Hossain chief editor ख़बर 36 गढ़ न्यूज़ सीपत: शिक्षक दिवस केवल शिक्षकों के सम्मान का अवसर नहीं, बल्कि उन शिक्षकों के योगदान को सामने लाने का दिन है, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी शिक्षा की लौ बुझने नहीं दी। शासकीय उन्नत प्राथमिक शाला धनुहारपारा कुकदा, विकासखंड मस्तूरी, जिला बिलासपुर के सहायक शिक्षक श्री चरण दास महंत का लगभग 19 वर्षों का शिक्षकीय सफर ग्रामीण एवं वनांचल क्षेत्र के बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने की प्रतिबद्धता का उदाहरण है।
कोरोना काल में भी जारी रही बच्चों की पढ़ाई
कोविड-19 महामारी के दौरान जब विद्यालयों के दरवाजे बंद थे और बच्चों का नियमित कक्षाओं से संपर्क टूटने का खतरा था, तब श्री महंत ने परिस्थितियों को चुनौती के रूप में स्वीकार किया। उन्होंने ऑनलाइन क्लास, मोहल्ला क्लास, ‘मिस्ड कॉल गुरुजी’ पहल और डिजिटल कंटेंट के माध्यम से बच्चों को पढ़ाई से जोड़े रखा।
जहाँ स्मार्टफोन और इंटरनेट की सुविधा प्रत्येक परिवार में उपलब्ध नहीं थी, वहाँ बच्चों तक शिक्षा पहुँचाने के लिए मोहल्ला स्तर पर छोटे-छोटे शिक्षण समूह बनाए गए। डिजिटल माध्यम से तैयार शैक्षणिक सामग्री, वीडियो एवं गतिविधियों के जरिए बच्चों को घर पर भी सीखने के अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया।
‘मिस्ड कॉल गुरुजी’ जैसी पहल के माध्यम से बच्चों और पालकों से संपर्क बनाए रखा गया। बच्चों की शैक्षणिक समस्याओं के समाधान के साथ उन्हें नियमित अध्ययन के लिए प्रेरित किया गया।
बच्चों के साथ शिक्षकों की भी मदद
श्री महंत का डिजिटल योगदान केवल विद्यार्थियों तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने बच्चों एवं शिक्षकों की सहायता के लिए हेल्पिंग वीडियो तैयार किए, जिनमें डिजिटल माध्यमों के उपयोग, शैक्षणिक गतिविधियों एवं विभिन्न कार्यों को सरल तरीके से समझाने का प्रयास किया गया। इससे शिक्षक साथियों को भी ऑनलाइन एवं तकनीक आधारित शिक्षण में सहायता मिली।
आज स्मार्ट क्लास में बदल गया है ग्रामीण विद्यालय
कोरोना काल की डिजिटल पहल से आगे बढ़ते हुए विद्यालय में स्मार्ट क्लास एवं ICT आधारित शिक्षण को प्रभावी रूप से अपनाया गया। ग्रामीण एवं आदिवासी बहुल क्षेत्र के जिन बच्चों के लिए कभी विद्यालय आना भी आकर्षक नहीं था, वही बच्चे आज स्मार्ट क्लास में उत्साहपूर्वक सीखते हैं।
डिजिटल वीडियो, चित्र, एनिमेशन, कहानी, गीत, खेल एवं गतिविधियों के माध्यम से कठिन विषयों को सरल और रोचक बनाने का प्रयास किया जाता है। बच्चों के हाथों में किताब-कॉपी के साथ स्टाइलिश पेन और चेहरे पर सीखने का आत्मविश्वास इस बदलाव की खूबसूरत तस्वीर प्रस्तुत करता है।
शिक्षा के साथ संवेदनशीलता
आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को शिक्षा की आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराने के लिए जनसहयोग जुटाने में भी श्री महंत की सक्रिय भूमिका रही है। जरूरतमंद विद्यार्थियों को कॉपी, पेन-पेंसिल, स्कूल बैग, जूते-मोजे, हाउस ड्रेस, स्वेटर, स्टेशनरी, कपड़े एवं चप्पल आदि उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया।
उनका उद्देश्य स्पष्ट रहा है कि किसी बच्चे की आर्थिक स्थिति उसकी शिक्षा में बाधा न बने।
स्कूल चलें हम से घर-घर संपर्क तक
विद्यालय में नामांकन और नियमित उपस्थिति बढ़ाने के लिए शाला प्रवेशोत्सव, स्कूल चलें हम अभियान, घर-घर संपर्क, पालक बैठक और ग्राम स्तरीय जागरूकता कार्यक्रमों को महत्व दिया गया। अनियमित बच्चों के घर जाकर पालकों से संवाद स्थापित किया गया तथा उन्हें शिक्षा के महत्व और बच्चों की नियमित उपस्थिति के लिए प्रेरित किया गया।
इन प्रयासों से विद्यालय और समुदाय के बीच विश्वास मजबूत हुआ तथा बच्चों को विद्यालय से जोड़े रखने में सकारात्मक परिणाम देखने को मिले।
FLN, NEP-2020 और गतिविधि आधारित शिक्षण
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 एवं निपुण भारत मिशन (FLN) की भावना के अनुरूप बच्चों में बुनियादी साक्षरता एवं संख्याज्ञान विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया गया। रटने के बजाय समझकर सीखने, करके सीखने और अनुभव आधारित शिक्षण को प्राथमिकता दी गई।
खेल, कहानी, गीत, भूमिका-अभिनय, समूह कार्य, स्थानीय संसाधन और टीएलएम के माध्यम से बच्चों को सीखने के अधिक अवसर दिए गए।
शिक्षक से शिक्षक-प्रशिक्षक तक
श्री महंत ने स्वयं नवाचार करने के साथ अपने अनुभव अन्य शिक्षकों तक पहुँचाने का भी प्रयास किया। BRG (Block Resource Group) के रूप में उन्होंने नवीन पाठ्यपुस्तकों, गतिविधि आधारित शिक्षण एवं प्रभावी कक्षा संचालन के संबंध में शिक्षक साथियों को प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन दिया।
विद्यालय विकास में जनसहयोग
विद्यालय को बेहतर बनाने में समुदाय की भागीदारी को उन्होंने विशेष महत्व दिया। स्मार्ट क्लास, शैक्षणिक संसाधन, विद्यार्थियों की आवश्यक सामग्री, सांस्कृतिक कार्यक्रम, स्वच्छता, वृक्षारोपण एवं पोषण वाटिका जैसी पहलों में सामुदायिक सहभागिता को प्रोत्साहित किया गया।
इससे विद्यालय केवल पढ़ाई का स्थान न रहकर समुदाय का साझा शैक्षणिक केंद्र बनने की दिशा में आगे बढ़ा।
उपलब्धियों को मिले अनेक सम्मान
शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को विभिन्न स्तरों पर सम्मान प्राप्त हुआ है। इनमें मुख्यमंत्री शिक्षा गौरव अलंकरण ‘शिक्षा दूत’ 2022, आदर्श शिक्षक सम्मान 2023-24, शिक्षक प्रतिभा सम्मान 2023, शिक्षा रत्न सम्मान 2025, छत्तीसगढ़ रत्न सम्मान 2020, बाबा साहब डॉ. अंबेडकर फेलोशिप अवार्ड 2020, छत्तीसगढ़ गौरव अवार्ड 2019, स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार तथा उत्कृष्ट कार्य के लिए विभागीय सम्मान प्रमुख हैं।
एक शिक्षक की सोच, जिसने बदली तस्वीर
श्री चरण दास महंत का मानना है कि “ग्रामीण बच्चे प्रतिभा में किसी से कम नहीं होते, उन्हें केवल अवसर, विश्वास और सही मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है।”
कोरोना काल में ऑनलाइन क्लास और मोहल्ला क्लास से लेकर आज स्मार्ट क्लास में डिजिटल शिक्षा तक की यह यात्रा बताती है कि तकनीक तभी सार्थक है, जब उसके पीछे बच्चों के प्रति संवेदनशील शिक्षक की सोच हो।
जहाँ कभी बच्चे स्कूल आने से कतराते थे, आज वही बच्चे उत्साह से विद्यालय आते हैं, स्मार्ट क्लास में सीखते हैं और स्टाइलिश पेन से अपने भविष्य की इबारत लिखते हैं।
शिक्षक दिवस 2026 पर यह कहानी केवल एक शिक्षक की उपलब्धियों की कहानी नहीं, बल्कि ग्रामीण शिक्षा में विश्वास, नवाचार, तकनीक और सामुदायिक सहभागिता से आए परिवर्तन की कहानी है।










