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बिलासपुर: सिम्स में C-ARM मशीन से पहला ऑपरेशन, आम मरीजों को निजी अस्पताल या रायपुर नहीं भटकना पड़ेगा ? Khabar 36 Garh is news bilaspur


अब जटिल ऑपरेशन यहीं संभव, ऑर्थोपेडिक एवं एनेस्थीसिया विभाग की संयुक्त दक्षता से मरीज को मिला नया जीवन

         Mohammad Nazir Hossain chief editor bilaspur chhattisgarh
ख़बर 36 गढ़ न्यूज़ बिलासपुर 6 जनवरी 2025/ छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) बिलासपुर को नववर्ष के अवसर पर प्राप्त अत्याधुनिक C-ARM मशीन अब केवल एक चिकित्सीय उपकरण नहीं, बल्कि गंभीर रूप से घायल मरीजों के लिए आशा, विश्वास और जीवन की नई किरण बनती जा रही है। इस मशीन का सिम्स अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति द्वारा विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर ऑपरेशन थिएटर में विधिवत शुभारंभ किया गया, जिसके पश्चात इसका उपयोग जटिल शल्यक्रियाओं में प्रारंभ हुआ।
उल्लेखनीय है कि विगत लगभग 7 वर्षों से सिम्स में C-ARM मशीन उपलब्ध नहीं होने के कारण हर वर्ष करीब 100 से 150 गंभीर हड्डी रोग एवं ट्रॉमा मरीजों को रायपुर अथवा निजी अस्पतालों में रेफर करना पड़ता था। अब C-ARM मशीन के उपलब्ध होने से यह मजबूरी समाप्त हो गई है और ऐसे जटिल ऑपरेशन सिम्स में ही सफलतापूर्वक किए जा रहे हैं।
इसी क्रम में C-ARM मशीन से पहला जटिल ऑपरेशन सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल एक मरीज पर सफलतापूर्वक किया गया।


प्राप्त जानकारी के अनुसार खेदु दास (उम्र 40 वर्ष), निवासी देवरीडीह, जिला बिलासपुर, दिनांक 27 दिसंबर 2025 को मोटरसाइकिल से कार्य से अपने घर लौट रहे थे। इसी दौरान दुर्गा मंदिर, व्यापार विहार के समीप एक ऑटो से उनकी जोरदार टक्कर हो गई। दुर्घटना के तुरंत बाद घायल को गंभीर अवस्था में सिम्स चिकित्सालय लाया गया।
चिकित्सकीय परीक्षण में पाया गया कि मरीज के दाहिने पैर की हड्डी टूटकर बाहर निकल गई थी, जो अत्यंत गंभीर एवं चुनौतीपूर्ण स्थिति थी। ऑर्थोपेडिक विभाग की तत्पर एवं अनुभवी टीम ने तत्काल प्राथमिक उपचार करते हुए हड्डी को उसी समय अंदर स्थापित किया तथा बाहर से रॉड लगाकर पैर को फिक्स किया गया, जिससे संक्रमण एवं अन्य जटिलताओं को समय रहते रोका जा सका।
घाव भरने के पश्चात आज दिनांक 5 जनवरी 2026 को सिम्स में हाल ही में स्थापित अत्याधुनिक C-ARM मशीन की सहायता से मरीज के पैर में टीबिया नेलिंग (अंदर से रॉड डालकर हड्डी को सही स्थिति में जोड़ने) की जटिल शल्यक्रिया पूरी तरह सफल रही। C-ARM तकनीक के माध्यम से सर्जरी के दौरान हड्डी की सटीक स्थिति प्रत्यक्ष रूप से देखी जा सकी, जिससे ऑपरेशन अधिक सुरक्षित, सटीक एवं प्रभावी सिद्ध हुआ।
इस सफल सर्जरी में ऑर्थोपेडिक विभाग के
डॉ. ए. आर. बैन, डॉ. संजय घिल्ले, डॉ. अविनाश अग्रवाल एवं डॉ. प्रवीण द्विवेदी की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
वहीं एनेस्थीसिया विभाग से विभागाध्यक्ष डॉ. मधुमिता मूर्ति, डॉ. भावना राय ज्यादा एवं डॉ. बर्मन द्वारा ऑपरेशन के दौरान कुशल एनेस्थीसिया प्रबंधन एवं निरंतर जीवनरक्षक निगरानी सुनिश्चित की गई।
अधिष्ठाता, चिकित्सा अधीक्षक एवं विभागाध्यक्ष के विचार
इस अवसर पर सिम्स अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने कहा—
“नववर्ष पर सिम्स को प्राप्त अत्याधुनिक C-ARM मशीन संस्थान के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। विधिवत पूजा के साथ इस मशीन का शुभारंभ कर इसे मरीजों की सेवा में समर्पित किया गया है। इससे अब जटिल से जटिल हड्डी रोग एवं सड़क दुर्घटना के मामलों का उच्चस्तरीय उपचार सिम्स में ही संभव हो सका है।”
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने कहा—
“C-ARM मशीन के आगमन से ट्रॉमा और ऑर्थोपेडिक सर्जरी के क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। अब सर्जरी के दौरान हड्डी की वास्तविक स्थिति तुरंत दिखाई देती है, जिससे ऑपरेशन की सफलता दर बढ़ी है और मरीजों को शीघ्र स्वास्थ्य लाभ मिल रहा है।”
वहीं ऑर्थोपेडिक विभागाध्यक्ष डॉ. ए. आर. बैन ने कहा—
“नई C-ARM मशीन ऑर्थोपेडिक विभाग के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो रही है। टीबिया नेलिंग जैसी जटिल शल्यक्रियाएं अब अधिक सटीकता और आत्मविश्वास के साथ की जा रही हैं, जिससे मरीजों की रिकवरी तेज हो रही है और जटिलताओं की संभावना में उल्लेखनीय कमी आई है।”
चिकित्सकों के अनुसार वर्तमान में मरीज की स्थिति स्थिर एवं संतोषजनक है तथा वह चिकित्सकीय निगरानी में तेजी से स्वस्थ हो रहा है।
सिम्स में स्थापित यह C-ARM मशीन अब प्रतिदिन सड़क दुर्घटना पीड़ितों एवं गंभीर हड्डी रोग से ग्रसित मरीजों के लिए नई आशा, नया विश्वास और नया जीवन लेकर आ रही है।

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