वनांचल क्षेत्र में शिक्षा की अलख जगा रहीं चंद्रिका मिरी: khabar 36 Garh is News Sipat ntpc bilaspur chhattisgarh


खेल-खेल में शिक्षा, स्मार्ट क्लास से बढ़ी उपस्थिति; पुरस्कार राशि से बनाया सांस्कृतिक मंच
Mohmmad Nazir Hossain chief editor ख़बर 36 गढ़ न्यूज़ सीपत/मस्तूरी :- वनांचल क्षेत्र के आदिवासी बच्चों के बीच शिक्षा की अलख जगाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और विद्यालय विकास की दिशा में उल्लेखनीय कार्य करने वाली शासकीय उन्नत प्राथमिक शाला धनुहारपारा कुकदा, विकासखंड मस्तूरी, जिला बिलासपुर की शिक्षिका श्रीमती चंद्रिका मिरी अपने नवाचारी प्रयासों के लिए पहचान बना रही हैं। उनका शिक्षण बच्चों को किताबों तक सीमित रखने के बजाय खेल, गतिविधि, तकनीक और स्थानीय परिवेश से जोड़ने पर केंद्रित है।
खेल-खेल में सीख रहे बच्चे
श्रीमती मिरी खेल-खेल में शिक्षा और गतिविधि आधारित शिक्षण को प्राथमिकता देती हैं। शैक्षणिक खेल, कहानी, चित्र, समूह गतिविधि, प्रश्नोत्तरी, अभिनय और विभिन्न प्रकार के TLM के माध्यम से बच्चों को सीखने के अवसर दिए जाते हैं। इससे बच्चों में सीखने के प्रति रुचि के साथ मौखिक अभिव्यक्ति, पठन-लेखन, तर्क क्षमता और आत्मविश्वास विकसित करने पर जोर दिया जाता है। बच्चों को अपनी बात रखने और गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए भयमुक्त वातावरण उपलब्ध कराया जाता है।
कोरोना काल में मोहल्ले तक पहुंची शिक्षा
कोरोना संक्रमण के दौरान जब विद्यालयों में नियमित कक्षाएं संचालित नहीं हो पा रही थीं, तब श्रीमती मिरी ने बच्चों की पढ़ाई को जारी रखने के लिए ऑनलाइन क्लास और मोहल्ला क्लास का सहारा लिया। उपलब्ध डिजिटल संसाधनों के माध्यम से बच्चों से संपर्क बनाए रखा गया और अभिभावकों को भी सीखने की प्रक्रिया से जोड़ा गया। इस कठिन दौर में शिक्षा की निरंतरता बनाए रखने के उनके प्रयास उल्लेखनीय रहे।
स्मार्ट क्लास से बढ़ी बच्चों की उपस्थिति
विद्यालय में स्मार्ट क्लास और डिजिटल कंटेंट का उपयोग बच्चों के लिए सीखने को अधिक रोचक बनाने में किया जा रहा है। वीडियो, चित्रों और डिजिटल सामग्री के माध्यम से विषयों को सरल तरीके से समझाया जाता है। इससे बच्चों में विद्यालय आने और कक्षा में सक्रिय रूप से भाग लेने की रुचि बढ़ रही है। डिजिटल माध्यमों के उपयोग ने विद्यालय के शैक्षणिक वातावरण को अधिक आकर्षक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
100 से अधिक पौधों से संवारा विद्यालय परिसर
शिक्षा के साथ पर्यावरण संरक्षण और जागरूकता को भी श्रीमती मिरी ने विद्यालय की गतिविधियों का हिस्सा बनाया है। विद्यालय परिसर में 100 से अधिक फलदार एवं छायादार पौधे लगाए गए हैं। इन पौधों की देखभाल की जिम्मेदारी बाल कैबिनेट और इको क्लब के बच्चों को दी गई है। इस पहल से बच्चों में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी का भाव विकसित किया जा रहा है। बच्चे केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनके संरक्षण और नियमित देखभाल में भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
पुरस्कार राशि को बच्चों के लिए किया समर्पित
श्रीमती चंद्रिका मिरी ने अपने पुरस्कारों से प्राप्त राशि को व्यक्तिगत उपयोग में लेने के बजाय विद्यालय के बच्चों के हित में लगाते हुए सांस्कृतिक मंच का निर्माण कराया। यह मंच विद्यालय में सांस्कृतिक कार्यक्रमों, रचनात्मक गतिविधियों और बच्चों की प्रतिभा को मंच देने का माध्यम बन रहा है। इससे बच्चों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने और आत्मविश्वास के साथ आगे आने का अवसर मिल रहा है।
पालकों और समुदाय को जोड़ा शिक्षा से
श्रीमती मिरी मातृ उन्मुखीकरण, अभिभावक संवाद और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से पालकों को बच्चों की शिक्षा से जोड़ने का प्रयास करती हैं। उनका मानना है कि विद्यालय और समुदाय के बीच बेहतर समन्वय से ही बच्चों की शिक्षा को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
सम्मानों की लंबी फेहरिस्त
शिक्षा के क्षेत्र में उनके नवाचार और समर्पण को विभिन्न प्रतिष्ठित सम्मानों से पहचान मिली है। उन्हें मुख्यमंत्री गौरव अलंकरण ‘शिक्षा दूत’ 2019, ZIIEI 2019, छत्तीसगढ़ गौरव अवॉर्ड 2019, Teacher of the Year 2019, सावित्रीबाई फुले शिक्षा रत्न अवॉर्ड 2020, छत्तीसगढ़ रत्न सम्मान 2020, शिक्षक प्रतिभा सम्मान 2023 तथा शिक्षा रत्न सम्मान 2025 से सम्मानित किया जा चुका है।
श्रीमती चंद्रिका मिरी का कार्य यह दर्शाता है कि शिक्षा केवल कक्षा और किताबों तक सीमित नहीं है। खेल से सीखने, तकनीक से जुड़ने, प्रकृति को समझने, समुदाय को साथ लेने और बच्चों की प्रतिभा को मंच देने की उनकी पहल वनांचल क्षेत्र के आदिवासी बच्चों के सर्वांगीण विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उनके प्रयासों से विद्यालय में शिक्षा के साथ-साथ पर्यावरण, रचनात्मकता, सहभागिता और आत्मविश्वास की संस्कृति विकसित हो रही है।









