मुहर्रम का चांद:आज खाना ए काबा का गिलाफ बदला गया : khabar 36 Garh is news Raipur Chhattisgarh

मक्का मुकर्रमा के चारों तरफ बड़े बड़े पहाड़ हैं जिससे वहां के लोगों को चांद नज़र नहीं आता, लोग इस लेज़र लाइट को देखकर समझ जाते हैं कि चांद दिख गया है

Mohammad Nazir Hossain chief editor
ख़बर 36 गढ़ न्यूज़ रायपुर: आप सभी को नया साल मुबारक हो। आज मुहर्रम के चांद की तस्दीक हुई। रॉयल क्लॉक टॉवर के ऊपर हरे कलर की लेज़र लाइट जलाई गई थी जिससे अतराफ के लोगों को भी चांद दिखने की जानकारी होती है। मक्का मुकर्रमा का मक्का रॉयल क्लॉक टॉवर दुनिया की सबसे ऊंची इमारतों में से एक है। इसकी कुल ऊंचाई 601 मीटर (1,972 फीट) है। जिसे रात में भी लाइटों के वजह से 25 से 30 किलोमीटर दूर तक साफ तौर से देखा जा सकता है। मक्का मुकर्रमा के चारों तरफ बड़े बड़े पहाड़ हैं जिससे वहां के लोगों को चांद नज़र नहीं आता और लोग इस लेज़र लाइट को देखकर समझ जाते हैं कि चांद दिख गया है जैसे हमारे यहां रोजा खोलते वक्त सायरन बजाकर लोगों को इत्तला दी जाती है। इसके साथ ही आज खाना ए काबा की गिलाफ भी बदला गया। हम सब वहां मौजूद रहे। बताया जाता है कि जमाने से एक रिवायत थी कि इस्लामी साल के आखिरी महिने जिल हिज्जा की नौवी तारीख को खाना ए काबा का गिलाफ बदला जाता था लेकिन अब सऊदी सरकार ने इसमे बदलाव किया है और जिल हिज्जा की जगह मुहर्रम की पहली तारिख को इसको बदला जाने लगा है । आज मुहर्रम की पहली तारिख है और मुहर्रम इस्लामिक कैलेंडर का पहला महीना होता है।
इस गिलाफ (अरबी भाषा में किस्वाह अल काबा भी बोला जाता है) में 120 किलो सोना और 100 किलो चांदी का इस्तेमाल होता है जिसमे सोने और चांदी के तारो से कुरआन की आयतें और अल्लाह का नाम लिखा होता है। हज के महीने में इस मुकद्दस मस्जिद की रस्मो रिवाज़ का पालन करते हुए काबा का गिलाफ बदला जाता है। हरम प्रशासन’ के मुताबिक, काबा के गिलाफ को तीन मीटर ऊपर उठाया जाता है और फिर गिलाफ को एक विशेष सूती सफेद कपड़े में लपेटा जाता है।
इस संबंध में हरम प्रशासन ने कहा कि काबा के गिलाफ को सुरक्षित रखने के लिए रमजान और हज के पवित्र महीने के दौरान इसे उठाया जाता है, क्योंकि इन दिनों दुनिया भर से लाखों लोग उमराह करने आते हैं और गिलाफ का बोसा लेते हैं, जिससे गिलाफ गंदा हो जाता है इसलिए इन मौकों पर गिलाफ के निचले हिस्से को ऊपर उठा दिया जाता है।
काबा के गिलाफ को उठाने के लिए विशेष दल होते हैं, जिसमें 50 से अधिक लोग भाग लेते हैं, इस काम के लिए एक विशेष सीढ़ी भी है जो सिर्फ गिलाफ बदलने के लिए ही इस्तेमाल में लाई जाती है। इसे ऊपर खींचने के लिए लगभग 50 लोग होते हैं, मैने जो वीडियो बनाया है उसमें देख सकते हैं।
बताया जाता है कि शुरुआती दौर में इसे मिस्र में बनाया जाता था लेकिन 1962 से इसे मक्का शहर में ही बनाया जाने लगा। इसके लिए खास एक डिपार्टमेंट भी बनाया गया है जिसे दारुल किस्वा बोला जाता है। इस बारे में हरम प्रशासन का कहना है कि काबा के गिलाफ को सुरक्षित रखने के लिए रमजान और हज के पवित्र महीने के दौरान इसे उठाया जाता है, क्योंकि इन दिनों दुनिया भर से लाखों लोग उमराह करने आते हैं। इन मौकों पर नीचे के हिस्से को ऊपर उठाया जाता है। काबा के गिलाफ को ऊपर उठाने का दूसरा कारण यह है कि हज यात्री उसका बोसा लेते हैं, जिससे गिलाफ गंदा हो जाता है ऐसा भी हरम प्रबंधन का कहना है। सही भी है पिछले दिनों खाना ए काबा के तवाफ के दौरान मैने देखा कि किसी हाजी ने इत्र डाल दिया था उतने हिस्से को कपड़े से सिलाई कर ढांक दिया गया था। अल्लाह पाक हम सबको खाना ए काबा का एहतराम करने की तौफीक अता फरमाए और तमाम मुसलमानों को हाजी नमाजी बनाए… आमीन सुम्मा आमीन हाजी मोहम्मद जाकिर (घुरसेना)









