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वादों की ‘राख’ में दबे ग्रामीण;एनटीपीसी सीपत प्रबंधन की तानाशाही: khabar 36 Garh is news Raipur Chhattisgarh

एनटीपीसी सीपत के डेम मे किस अधिकारी के संरक्षण मे चल रहा करोडो का घोटाला एक राखड़ वाहन मे अनेक नेम प्लेट और कट रहा फर्जी बिल्टी



ये विकास है या विनाश? आदिवासियों की नौकरी पर डाका और सड़के बन गए है खंडहर

एनटीपीसी के चर्चित अधिकारी का “बैंक अकाउंट” मोबाइल कॉल डिटेल और उनके चहेते का भी कराया जाए सीबीआई से जाँच करोडो अरबो के होंगे खुलासे

बिलासपुर-जिला मुख्यालय से महज 15 किमी कि दुरी पर स्थित महारत्न(NTPC) सीपत
जब न्याय की उम्मीद केवल कागजों और आश्वासनों तक सिमट जाती है, तो जन-आक्रोश का सड़कों पर उतरना तय हो जाता है। एनटीपीसी (NTPC) सीपत प्रबंधन द्वारा भू-विस्थापितों और जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों को लगातार ‘गुमराह’ करने और झूठे आश्वासन देने की नीति ने अब आग में घी डालने का काम किया है।

एनटीपीसी के विवादित अधिकारी का सीबी आई करें जाँच हो जाएगा दूध का दूध और हो जाएगा पानी का पानी

क्षेत्र के जनप्रतिनिधी नरेन्द्र वस्त्रकार और रेवा शंकर साहू का खुली चुनौती देते हुए कहा की भ्रष्टाचार को लेकर जिला प्रशासन से लगातार शिकायत किए जा रहे है,पर अभी तक किसी भी प्रकार कि कोई कार्यवाही नहीं हुई है, उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि एनटीपीसी के एक चर्चित अधिकारी का “बैंक अकाउंट” मोबाइल कॉल डिटेल और उनके चहेते का भी सीबीआई से एसी जाँच कराए जाने पर करोडो अरबो के घोटाले का खुलासा होने का दावा किया है
धोखे के शिकार हुए जनप्रतिनिधि:‘घुमाने’ की रणनीति बेनकाब
स्थानीय जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि पिछले दो महीनों से प्रबंधन ने चर्चाओं के नाम पर केवल समय बिताया है। 9 मार्च को प्रस्तावित आंदोलन को यह कहकर टाला गया था कि 1 मई तक मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई होगी। लेकिन जैसे-जैसे समय नजदीक आया, प्रबंधन के सुर बदल गए। अधिकारियों ने समाधान निकालने के बजाय किसानों, ग्रामीणों,जनप्रतिनिधियों को बैठकों के जाल में उलझाकर रखा, जिससे यह संदेश गया है कि प्रबंधन उनकी समस्याओं के प्रति गंभीर बिल्कुल नहीं है।
एनटीपीसी (NTPC) सीपत प्रबंधन और स्थानीय ग्रामीणों के बीच विवाद अब चरम पर पहुँच गया है। गतौरा, सुखरीपाली, और आसपास के प्रभावित गांवों के ग्रामीणों ने प्रबंधन पर वादाखिलाफी, भ्रष्टाचार और स्थानीय लोगों के शोषण का गंभीर आरोप लगाए है

भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग का गंभीर आरोप

तक कि ईएसआई (ESI) नियमों का भी पालन नहीं हो रहा है।

श्रमिक शोषण और प्रशासनिक तानाशाही
मजदूरों को ₹541 के बजाय केवल ₹300-350 मजदूरी दी जा रही है। स्थानीय ट्रांसपोर्टरों का पेमेंट रोककर उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है। सबसे गंभीर बात यह है कि हक मांगने पर ग्रामीणों को रासुका (NSA) लगाने की धमकी दी जा रही है, जिसे ज्ञापन में अलोकतांत्रिक बताया गया है।

जानकारों का कहना है
श्रम कानूनों की धज्जियां और आर्थिक शोषण
न्यूनतम मजदूरी अधिनियम, 1948′ (Minimum Wages Act) का सीधा उल्लंघन है। साथ ही, कार्य के दौरान मृत्यु होने पर उचित मुआवजा न देना ‘कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम’ (ESI Act) के प्रावधानों को चुनौती देता है।

दमनकारी नीतियों का विरोध
प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे जनपद सदस्य रेवा शंकर साहू और स्थानीय सरपंचों ने कहा कि जब भी ग्रामीण अपने हक की बात करते हैं, तो उन्हें रासुका (NSA) लगाने की धमकी देकर चुप कराने की कोशिश की जाती है, जो पूरी तरह अलोकतांत्रिक है। ठेका मजदूरों को भी शासन द्वारा निर्धारित ₹541 के बजाय केवल ₹300-350 मजदूरी दी जा रही है।

“कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीणों द्वारा लगाए गए ये 24 आरोप केवल शिकायतें नहीं हैं, बल्कि ये न्यूनतम मजदूरी अधिनियम, पर्यावरण संरक्षण नियमों और पेसा कानून के खुले उल्लंघन का प्रमाण हैं। यदि प्रशासन इन बिंदुओं पर निष्पक्ष जांच करता है, तो प्रबंधन के कई बड़े अधिकारियों पर कानूनी गाज गिरना तय है।”

जवाब नहीं दिए अधिकारी नहीं उठाए फोन

उक्त शिकायत के मामले मे जब एनटीपीसी के जिम्मेदार अधिकारी को उनका पक्ष जानने कई बार फोन लगाया गया पर फोन पर जवाब नहीं दिए और ना ही फोन उठाए

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